मशेदपुर। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता सह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने केंद्र सरकार के आम बजट पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग के साथ खुला अन्याय है और देश की वास्तविक समस्याओं से पूरी तरह कटा हुआ है।



किसानों की अनदेखी, बेरोज़गारी पर चुप्पी
कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि देश इस समय गंभीर बेरोज़गारी संकट से जूझ रहा है और किसान बदहाली की स्थिति में हैं, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पूरे बजट भाषण में किसानों का नाम तक लेना ज़रूरी नहीं समझा। उन्होंने इसे सरकार की संवेदनहीनता का प्रतीक बताया और कहा कि कृषि संकट पर चुप्पी बेहद चिंताजनक है।
कॉरपोरेट और निवेश मोर्चे पर भी निराशा
उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सेक्टर को टैक्स इंसेंटिव के ज़रिए निवेश और रोज़गार बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार इस मोर्चे पर भी पूरी तरह विफल रही। सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने से निवेशकों का मनोबल टूटा है, जिसका सीधा असर शेयर बाज़ार पर पड़ा और Sensex व Nifty में गिरावट देखने को मिली।
बाज़ार की उम्मीदें टूटीं
षाड़ंगी ने कहा कि बाज़ार को उम्मीद थी कि सरकार विकास को गति देने के लिए आक्रामक खर्च करेगी, लेकिन अत्यधिक सतर्कता के चलते शॉर्ट टर्म निवेशकों का भरोसा टूट गया। इससे आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
आम जनता को आयकर में राहत नहीं
उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता को आयकर में कोई वास्तविक राहत नहीं दी गई। उल्टा, छोटी-सी चूक पर 100 प्रतिशत पेनल्टी का डर दिखाकर करदाताओं को भयभीत किया गया है, जो मध्यम वर्ग के लिए चिंता का विषय है।
‘डर और निराशा का बजट’
कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि यह बजट विकास का नहीं, बल्कि डर, निराशा और दिशाहीनता का बजट है। जब किसान उपेक्षित हों, युवा बेरोज़गार हों और निवेशक निराश हों, तो स्पष्ट है कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सिर्फ़ आंकड़ों को संभालने में लगी है।





