कांटों भरा ताज पहनते ही दर्द से कराह उठे पुरेन्द्र
तीन दिनों से चले आ रहे हाई वोल्टेज ड्रामा के क्लाईमेक्स में पुरेन्द्र ने प्रदेश नेतृत्व पर मारा बाउंसर
प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि जबतक शिकायतों का निपटारा नहीं हो जाता उन्हें अध्यक्ष पद से निलंबित माना जाए.
संतोष कुमार
जमशेदपुरः पूर्वी सिंहभूम जिला राजद में तीन दिनों तक चले ड्रामे में बुधवार को अजीबोगरीब क्लाईमेक्स देखा गया. तीन दिनों पूर्व जिस पुरेन्द्र नारायण सिंह को पार्टी की ओर से जिलाध्यक्ष का कमान सौंपा गया था, जिसके बाद मंगलवार को पुरेन्द्र नारायण सिंह बतौर मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी के अंदरूनी कलह को समाप्त करने का दंभ भर रहे थे बुधवारा को उसी पुरेन्द्र द्वारा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपने मनोनय को निलंबित करने का आवेदन देने संबंधी जानकारी उसी मीडिया के माध्यम से दी गई. हालांकि इस संबंध में पुरेन्द्र ने पूरे मामले पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस राजद के लिए अपना पूरा कैरियर दांव पर लगा दिया. आज उसी राजद के वरीय प्रबंधन की ओर से जब पूर्वी सिंहभूम जिले की कमान जब सौंपी गई तो पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं को मुझसे महज इस बात से नाराजगी हो गई कि मेरा गृह जिला पूर्वी सिंहभूम नहीं है. उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा को लिखे पत्र का हवाला देते हुए बताया कि बतौर राजद कार्यकर्ता उन्होंने राजनीतिक कैरियर पूर्वी सिंहभूम जिले से ही शुरू की एवं कई पदों पर रहते हुए इस स्थान पर पहुंचे लेकिन पार्टी के कुछ मुट्ठीभर लोगों को मेरा मनोनय स्वीकार्य नहीं है ऐसे में पार्टी को चलाना संभव नहीं है. हालांकि मंगलवार को श्री सिंह ने कहा था कि पार्टी के अंदरूनी कलह से निपट लिया जाएगा. उक्त पत्र के माध्यम से श्री सिंह ने कहा कि उनके लिए पार्टी महत्वपूर्ण है पद नहीं. जबतक पार्टी में उनके नाम पर एका न बने उन्हें पद से निलंबित माना जाए.
अंदर की बात
इस सर्दभ में प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा से बात की गई. जिसपर उन्होंने टालते हुए कहा कि पुरेन्द्र नारायण सिंह के नाम पर पार्टी बैठक के दौरान सहमति बनी थी मगर किसी प्रकार की कोई आधिकारिक प्रताचार आदि नहीं की गई. उन्होंने पुरेन्द्र को मीडिया प्रायोजित जिलाध्यक्ष बताते हुए कहा कि पार्टी का इससे कोई लेना- देना नहीं है. पार्टी नियमावली के अनुसार पुरेन्द्र का गृह जिला सरायकेला- खरसावां में है. एवं आदित्यपुर नगरह परिषद् के किसी पद पर भी वर्तमान समय में हैं. जिस कारण उन्हें पूर्वी सिंहभूम जिलाध्यक्ष का पद कैसे दिया जा सकता है. हालांकि पुरेन्द्र नारायण के पत्र के संबंध में उन्होंने कहा कि पुरेन्द्र पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन पार्टी किसी के भावना से नहीं बल्कि नियमों से चलती है. उन्होंने रांची से बाहर होने का हवाला देते हुए पत्र मिलने से इंकार किया.
फैक्ट फाईल
जैसा कि हमने शुरू से की अपने अखबार के माध्यम से (पुरेन्द्र नारायण को पूर्वी सिंहभूम जिले की कमान सौंपे जाने के बाद से) ही पार्टी में उनके खिलाफ जागी गतिरोध को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया का आंकलन करते हुए स्पष्ट कर दिया था कि विरोधियों के वार को कैसे झेलेंगे जो कि फिलहाल सही साबित होता दिख रहा है. इस संबंध में राजद के वरिष्ठ कार्यकर्ता देवप्रकाश देवता ने पुरेन्द्र नारायण को पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण निष्काषित बताया था, एवं पूर्वी सिंहभूम जिले की कमान सौंपे जाने के पीछे पैसों का खेल बताया था. उन्होंने पुरेन्द्र के मनोनय के पीछे झारखंड विकास मोर्चा से राजद में लौटी एक नेत्री की भूमिका के संबंध में भी जानकारी दी थी. वर्तमान जिलाध्यक्ष अंबिका बनर्जी ने भी पुरेन्द्र के मनोनय को पार्टी विरोधी करार देते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. कुल मिलाकर पुरेन्द्र नारायण सिंह कांटों भरे ताज की पीड़ा को सहन नहीं कर सके जिसके बाद आनन- फानन में बुधवार को मीडियाकर्मियों के बीच पहुंचकर स्वयं को निलंबित माने जाने का हवाला देते हुए अपना बाउंसर प्रदेश नेतृत्व पर फेंकते हुए किनारा कर लिया. अब देखना ये है कि मीडिया द्वारा प्रायोजित पूर्वी सिंहभूम राजद जिलाध्यक्ष अपनी सफाई में अगला कदम क्या उठाते हैं.
