हाजीपुर |
यात्री संरक्षा और रेल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूर्व मध्य रेल ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आधुनिक टक्कर रोधी तकनीक ‘कवच’ के साथ मानपुर–सरमाटांड रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया गया है। यह कदम रेल सुरक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।



93.3 किमी लंबे रेलखंड पर ‘कवच’ सक्रिय
पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह के नेतृत्व और मार्गदर्शन में 30 जनवरी 2026 को डीडीयू–प्रधानखांटा रेलखंड के अंतर्गत 93.3 किमी लंबे मानपुर–सरमाटांड सेक्शन पर ‘कवच’ प्रणाली को सफलतापूर्वक चालू किया गया। इसके साथ ही इस मार्ग पर अब कवच युक्त सुरक्षित ट्रेन संचालन की शुरुआत हो गई है।
पहली ट्रेन का सफल ट्रायल
इसी दिन सुबह 07:42 बजे ट्रेन संख्या 13305 सासाराम इंटरसिटी एक्सप्रेस सरमाटांड स्टेशन से रवाना हुई और 09:35 बजे मानपुर स्टेशन पहुँची। यह ट्रेन पूरी तरह कवच से लैस सुरक्षा फीचर्स के साथ संचालित की गई।
ट्रायल के दौरान हेड-ऑन कोलिजन टेस्ट भी किया गया, जिसमें ट्रेन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार 4259 मीटर की दूरी पर स्वतः रुक गई। यह परीक्षण कवच प्रणाली की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
दिल्ली–हावड़ा मार्ग का अहम हिस्सा
गौरतलब है कि पूर्व मध्य रेल के कुल 4238 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली लगाए जाने की योजना है। इनमें से लगभग 417 रूट किलोमीटर लंबा पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन–मानपुर–प्रधानखांटा रेलखंड दिल्ली–हावड़ा के व्यस्ततम रेल मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह मार्ग उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से होकर गुजरता है, जिसमें 8 जंक्शन सहित कुल 77 स्टेशन, 79 लेवल क्रॉसिंग गेट और 7 इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नल शामिल हैं।
तेज रफ्तार और सुरक्षित भविष्य
इस रेलखंड पर वर्तमान में 130 किमी प्रति घंटा की स्वीकृत गति है। मिशन रफ्तार के तहत इसे बढ़ाकर 160 किमी प्रति घंटा करने का कार्य प्रगति पर है। कवच प्रणाली के लागू होने से तेज रफ्तार के साथ-साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
क्या है ‘कवच’ तकनीक
‘कवच’ एक स्वदेशी टक्कर रोधी तकनीक है, जो माइक्रोप्रोसेसर, जीपीएस और रेडियो संचार पर आधारित है। यह तकनीक उसी ट्रैक पर सामने या पीछे मौजूद ट्रेन का पता लगते ही लोको पायलट को सतर्क करती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगा देती है।
यह प्रणाली सिग्नलिंग सिस्टम से जुड़ी रहती है और आपात स्थिति में स्टेशन स्टाफ व लोको पायलट को तत्काल अलर्ट भेजती है। साइड टक्कर, आमने-सामने और पीछे से होने वाली टक्करों की रोकथाम में यह पूरी तरह सक्षम है।
रेलवे का शून्य दुर्घटना लक्ष्य
कवच प्रणाली भारतीय रेलवे के शून्य दुर्घटना लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे यात्रियों का भरोसा और रेल संचालन की विश्वसनीयता दोनों और मजबूत होंगी।





