दुमका। संताल परगना के साहित्यिक परिदृश्य में एक गरिमामय अध्याय उस समय जुड़ गया, जब डॉ. यू.एस. आनंद को उनकी चार दशकों से अधिक की सतत साहित्य साधना के लिए ‘सतीश स्मृति विशेष सम्मान–2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान सतीश स्मृति मंच द्वारा स्वर्गीय सतीश चंद्र झा की जयंती (29 जनवरी) के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। कार्यक्रम ने दुमका को एक बार फिर साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया।



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गरिमामय समारोह, विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी
समारोह में सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुनुल कंदीर मुख्य अतिथि तथा दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि सतीश स्मृति मंच वर्ष 2009 से झारखंड और अंग क्षेत्र के हिंदी व अंगिका साहित्यकारों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित करता आ रहा है। इस वर्ष विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन के बीच डॉ. आनंद का सम्मान समारोह का विशेष आकर्षण रहा।
डॉ. यू.एस. आनंद: साहित्य के वटवृक्ष
5 नवंबर 1954 को जन्मे डॉ. यू.एस. आनंद एम.ए. (हिंदी), पीएच.डी. तथा सेवानिवृत्त प्राध्यापक हैं। वे विगत तीन दशकों से प्रतिष्ठित हिंदी मासिक पत्रिका अपूर्वया का संपादन कर रहे हैं।
उनकी प्रमुख रचनाओं में नाटक “मुझे न्याय चाहिए” और दोहा संग्रह “माटी कहे कुम्हार से” शामिल हैं। उनकी कहानियाँ और कविताएँ देश-विदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं तथा आकाशवाणी से भी उनका साहित्य प्रसारित होता रहा है।
बाल साहित्य और हिंदी प्रचार में योगदान
डॉ. आनंद ने बाल साहित्य को भी विशेष समृद्ध किया है। उनकी पुस्तक “तीन कंजूस व अन्य कहानियाँ” को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा पुनः प्रकाशित किया गया, जिसका उद्देश्य डिजिटल युग में बच्चों को फिर से किताबों की ओर आकर्षित करना है।
उन्होंने अहिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रचार-प्रसार में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई है, जिससे संताल परगना की साहित्यिक विरासत और सशक्त हुई है।
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पता: तेलीपाड़ा मार्ग, दुमका, झारखंड






