रांची– झारखंड में रेलवे का जोनल कार्यालय ख¨लने का आग्रह: सीएम

 

रांची,16जनवरी। मुख्यमंत्री  रघुवर दास ने आज पटना के संवाद भवन में पूर्वी क्षेत्र अन्तर्राज्यीय परिषद की बैठक में भाग लिया। उन्होने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस परिषद के सभी सदस्य राज्यों में गरीबी, अशिक्षा, अपर्याप्त बुनियादी सुविधाएं बाढ़, सूखा इत्यादि प्राकृतिक आपदाअों  जैसे लगभग सामान्य समस्याएं हैं। अपने राज्य के संबंध में उन्होने कहा कि झारखण्ड एक लैण्ड लक्ड राज्य है, जिस कारण राज्य के अंदर एवं बाहरी प्रदेश के लिए रोड कनेक्टीविटी मूलभूत एवं महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उक्त पथ पर ट्रैफिक पर्याप्त है, जहाँ वर्तमान में स्थित 2-लेन के स्थान पर उसका चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण से ही समस्या का निदान संभव है, जो  एनएचडीपी-4 अन्तर्गत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री  ने कहा कि एनएच-75 के लिए 62 प्रतिशत भूमि उपलब्ध है तथा भूअर्जन की प्रक्रिया प्रगति पर है। दोनो राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमशः उड़ीसा, छत्तीसगढ़ तथा उत्तरप्रदेश क¨ ज¨ड़ने के लिए महत्वपूर्ण है। एनएच-23 विशेषकर उड़ीसा बन्दरगाह को  जोड़ने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मार्ग है। उक्त मार्ग में जुड़ने वाले सभी जिले के क्षेत्र पिछड़ा, आदिवासी बाहुल्य एवं नक्सल प्रभावित होने  के कारण भी इनका निर्माण अत्यन्त आवश्यक हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने झारखण्ड में रेलवे का जोनल कार्यालय खोले जाने का भी अनुरोध किया। उन्होने राँची, बोकारो एवं जमशेदपुर के दुग्ध उत्पाद परियोजना एवं मवेशी चारा संयत्र  के स्वामित्व, पश्चिम बंगाल के साथ साहेबगंज जिले के 49 मौजो  पर प्रतिवेदन तथा कोयले पर रॉयल्टी की बढ़¨त्तरी के संबंध में भी अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड राज्य में विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रो के विकास के लिए अगस्त 2012 में कॉनेक्टीविटी को बढ़ाने के उद्देश्य से 21 योजनाअो  को शामिल किया गया है। तात्कालिकता तथा आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा कुछ योजनाअो  को अंगीकार किया गया है। शेष 11 योजनाअो  (लगभग 275 किमी) पर 650 करोड़ रु0 की लागत से संबंधित डीपीआर तैयार की जा चुकी है। राज्य सरकार की  इन योजनाअो की स्वीकृति की अपेक्षा है। मुख्यमंत्र्ाी ने गंगा नदी पर पुल निर्माण के विषय में ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि  यह एक लम्बे समय से लंबित मुद्दा रहा है। यह देश के उत्तर-पूर्व के लिये प्रवेश द्वारा ख¨लेगा अ©र इससे विशेषकर झारखण्ड तथा बिहार दोनो ¨ं राज्यो   को  फायदा होगा।

उन्होने राज्य में चल रही रेल परियोजनाअो  के संबंध में कहा कि राज्य में राँची-कोडरमा, रांची-लोहरदगा-टोरी, कोडरमा-तिलैया, कोडरमा-गिरिडीह, दुमका-रामपुर हाट अौर देवघर-दुमका रेल परियोजनाएं वर्ष 2002 से चल रही हैं जिनक¨ वर्ष 2007-2013 के लिये अवधि विस्तार भी दिया गया है किन्तु इन परियॉोजनाअो   के ¨ सम्पूर्ण रुप से पूरा किया जाना अभी भी शेष है, रेलवे द्वारा अवधि विस्तार की मांग के प्रस्ताव पर राज्य सरकार द्वारा सहमति प्रदान की गयी तथा रेल प्राधिकार क¨ एम0अ¨0यू0 पर हस्ताक्षर करने के लिए तारीख एवं समय सीमा तय करने हेतु सूचित भी कर दिया गया, लेकिन रेलवे मंत्र्ाालय द्वारा राज्य सरकार क¨ अब तक पत्र्ा का जवाब नहीं प्राप्त हुआ है।

इन परिय¨जनाअ¨ं के अतिरिक्त आर्थिक मामल¨ं की मंत्र्ािमंडल समिति ने ग¨ड्डा-पीरपैंती रेलवे लाईन तथा हंसडीहा-जसीडीह रेलवे लाईन का निर्माण 50ः50 प्रतिशत की साझेदारी के आधार पर करने की स्वीकृति दी है। परिवहन विभाग झारखण्ड ने पूर्व में ही रेलवे प्राधिकार से विवरणी उपलब्ध कराने का अनुर¨ध किया है ताकि राज्य सरकार द्वारा एमअ¨यू पर हस्ताक्षर करने के लिए अग्रेतर कार्रवाई की जा सके, किन्तु रेलवे मंत्र्ाालय का उत्तर अब तक प्रतीक्षित है।

मुख्यमंत्र्ाी ने राज्य में सूचना प्र©द्य्न¨गिकी के क्षेत्र्ा में विकास हेतु आईआईआईटी की स्थापना के संबंध में कहा कि राष्ट्रीय संचालन समिति के अनुम¨दन के बावजूद झारखण्ड सरकार क¨ इस संबंध में अ©पचारिक सूचना प्राप्त नहीं है। इस बीच इस उद्देश्य के लिए कर्णांकित 65 एकड़ में से 50 एकड़ जमीन आवंटित कर दी गई है शेष 15 एकड़ भूअर्जन के तहत प्रक्रियाधीन है। सूचना प्र©द्य्न¨गिकी एवं संचार मंत्र्ाालय भारत सरकार के प्रस्ताव क¨ स्वीकार करते हुए झारखण्ड सरकार ने रांची में राष्ट्रीय ई-शासन अकादमी की स्थापना के लिए भूमि चिन्हित कर ली है तथा उक्त कार्य हेतु निशुल्क भूहस्तांतरण के लिए इच्छा भी व्यक्त की गई है।

मुख्यमंत्र्ाी ने कहा कि राज्य में सक्रीय सार्वजनिक क्षेत्र्ा की खनन कम्पनियां व उपक्रम जैसे सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल, ई आक्शन, लिंकेज अ©र क¨यला बिक्री के आंकड़े उपलब्ध नहीं कराती है जिस कारण सरकार राजस्व की वसूली नहीं कर पाती है। इसी तरह कर में नुकसान तथा राजस्व में कमी का मामला रेलवे से भी संबंधित है। रेल मंत्र्ाालय क¨ ये आंकड़े डिजिटल रुप से राज्य¨ं से साझा करनी चाहिए। उन्ह¨ंने कहा कि सरकारी अभिलेख¨ं में जंगल-झाड़ी के रुप में दर्ज सरकारी जमीन भी वन संरक्षण अधिनियम के तहत क्लीयरेंस के लिए वन भूमि की परिभाषा के अन्तर्गत लाए जाने के मामले क¨ उठाते हुए कहा कि प्रतिपूरक वनीकरण के लिए गैर वन भूमि के अभाव में राज्य के विकास की परिय¨जनाएं लंबित ह¨ रही हैं अथवा बंद ह¨ रही है। केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र्ा के उपक्रम¨ं की तरह राज्य सरकार क¨ भी भूमि के हस्तांतरण से छूट दिया जाना वांछनीय है।

मुख्यमंत्र्ाी ने कहा कि मादक दवाअ¨ं तथा नशीले पदार्थों के अवैध तसकरी के मामले में खुफिया जानकारी एवं सूचनाएं राज्य¨ं क¨ साझा करना सभी के लिए लाभदायक ह¨गा। राज्य¨ं के पुलिस, एक्साईज तथा नारक¨टिक्स ब्यूर¨ के बीच नियमित संवाद स्थापित करने के लिए एक तंत्र्ा बनाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्र्ाी ने झारखण्ड क्षेत्र्ा के कैडेस्ट्रल नक्शे के हस्तांतरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह मामला विभाजन के बाद से ही बिहार सरकार के साथ लंबित है।इस कारण भू-अभिलेख के कम्प्यूटरीकरण का कार्य बाधित है।

उन्ह¨ंने कहा कि आपदा प्रबंधन के संबंध में सदस्य राज्य¨ं के बीच सहय¨ग की आवश्यकता है साथ ही केन्द्र सरकार का सहय¨ग भी अपेक्षित है। प्राकृतिक आपदा जैसी विषम परिस्थितिय¨ं का सामने करने के लिए सभी सदस्य राज्य¨ं के संसाधन¨ं क¨ साझा किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्ह¨ंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा रिस्प¨ंस बल क¨ राज्य आपदा रिस्प¨ंस बल के साथ मिल कर कार्य करना चाहिए। आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में जन-बल क¨ प्रशिक्षित किए जाने की आवश्यकता है। आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण क¨ सभी कॉलेज¨ं के पाठयक्रम में सम्मिलित किए जाने पर  विचार किया जा सकता है। उन्ह¨ंने कहा कि झारखण्ड में वज्रपात की घटना काफी ह¨ती है। वज्रपात से ह¨ने वाली मृत्यु का राष्ट्रीय अ©सत चार स© है जबकि अकेले झारखण्ड में यह अ©सत 200 व्यक्ति प्रति वर्ष है। मानव हस्तक्षेप से न त¨ इसे टाला जा सकता है अ©र न ही इसे र¨का जा सकता है। उन्ह¨ंने कहा कि वज्रपात से ह¨ने वाली आपदा क¨ राष्ट्रीय आपदा की श्रेणी में सम्मिलित किया जाए ताकि पीडि़त¨ं क¨ गृह मंत्र्ाालय भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए दिशा निर्देश¨ं के अनुसार सहायता एवं अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई जा सके।

मुख्यमंत्र्ाी ने कहा कि झारखण्ड क¨ पड़¨सी राज्य¨ं जैसे उड़ीसा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि से ज¨ड़ती नदी बेसिन के जल ग्रहण क्षेत्र्ा¨ं में बाढ़ का खतरा रहता है। मॉनसून के द©रान, अ¨डि़शा, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में स्थित बांध¨ में जमा अतिरिक्त पानी के अचानक छ¨ड़े जाने से झारखण्ड क¨ खतरा उत्पन्न ह¨ता है। पानी क¨ छ¨ड़ना अपरिहार्य है परन्तु यह मुमकीन है कि बहाव क्षेत्र्ा के वासिय¨ं क¨ पूर्व में सूचना उपलब्ध करायी जाय ताकि समय से राहत एवं बचाव कार्य किया जाय तथा जान-माल का नुकसान कम से कम ह¨। इसी तरह, झारखण्ड में स्थित मैथन, तेनुघाट, मसानज¨र, चांडिल, आदि बाँध व जल निकाय तथा स्वर्णरेखा, दाम¨दर, आदि नदिय¨ं के बाहर प्रावाह की कृषि हेतु उपय¨ग पश्चिम बंगाल तथा अ¨डि़सा में किया जाता है।

हाँलांकि पानी के बँटवारे पर समन्वय हेतु केन्द्रीय जल आय¨ग न¨डल एजेंसी है, पर वास्तविक समय में नदिय¨ं के जलस्तर की निगरानी, ससमय र¨कथाम हेतु ससमय चेतावनी जारी करने एवं पर्यात्प रुप से राहत प्रदान करने हेतु सभी राज्य¨ं के जल संसाधन विभाग¨ं एवं केन्द्रीय जल आय¨ग क¨ राज्य¨ं के आपदा प्रबंधन विभाग के साथ समन्वय करने की आवश्यकता है।

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