बैगलूरू-सरयू राय ने भाषायी संघवाद एवं भाषायी बहुलतावाद को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया

 

बंगलुरु। निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के 89वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए  सरयू राय ने भाषायी संघवाद एवं भाषायी बहुलतावाद को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया और इसमें निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की भूमिका की सराहना की. उन्होंने सुदुर दक्षिणवर्ती कन्नड़ भाषी राज्य में भारत के पूर्वी क्षेत्र की बंगला भाषा का साहित्य सम्मेलन करना इसका द्योतक है.

उन्होंने पूर्व मध्यकाल में चार्यपद की रचना और संस्कृत वांगमय के प्रसंगों के अनुवाद के साथ आरम्भ बंग साहित्य की धारा ने पूर्व एवं पाश्चात्य मध्यकालीन युग तथा आधुनिक युग के साहित्य में अप्रतिम एवं अतुलनीय रचनायें देश के साहित्य जगत को प्रदान की है जो समस्त साहित्य प्रेमियों के लिये अनुकरणीय है.

उन्होने कहा कि भारत का पूर्वी एवं पूर्वोतर क्षेत्र बंग साहित्य और संस्कृति तथा कृति से प्रभावित है. न केवल साहित्य बल्कि अध्यात्म, राजनीति, आंदोलन, समाज सुधार, विज्ञान, संगीत और फ़िल्म के क्षेत्र में भी बंगभाषी समुदाय ने अद्भुत योगदान दिया है. इन विविध क्षेत्रों में जितने महत्वपूर्ण और अनुकरणीय व्यक्तित्व भारत के पूर्वी क्षेत्र के इस समुदाय ने दिया है उतना किसी अन्य क्षेत्र एवं भाषायी समुदाय ने नहीं दिया है.
सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रुप में भारतवर्ष राष्ट्रपति  प्रणव मुखर्जी, कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, मुख्य न्यायाधीश शुभ्रकमल मुखर्जी ने संबोधित किया.सांसद प्रदीप भट्टाचार्य और महासचिव जयंत घोष
ने स्वागत भाषण किया.

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