जमशेदपुर-भला इमरजेंसी को कैसे भूल सकते हैः विनोद शरण

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एक दिन अनशन पर भी बैठे तेनुघाट में
वरिष्ठ पत्रकार विनोद कुमार शरण का भी छात्र आंदोलन से नाता रहा है. उस वक्त वे तेनुघाट में रहते थे. वे बताते हैं कि तब वे तेनुघाट में ही आठवीं में पढ़ते थे. छात्र आंदोलन चल रहा था. जगह – जगह तत्कालीन मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के खिलाफ आंदोलन हो रहा था. उनके खिलाफ नारे लग रहे थे. तीन दिन के बंद का आह्नान किया गया था. इसी दौरान तीन दिन का तेनुघाट में क्रमिक अनशन का भी कार्यक्रम तेनुघाट चौक पर रखा गया था. मैं भी इस आंदोलन से काफी प्रभावित था. हालांकि मुझे काफी समझ नहीं थी, लेकिन यह लग रहा था कि एक बेहतर कॉज के लिए आंदोलन हो रहा है, तो मैं भी इसमें शामिल हो गया और एक दिन का उपवास किया. उनके साथ सहपाठी आरुणी प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिन्हा आदि भी एक दिन के उपवास पर बैठे. चिकित्सक भी आये जांच की. शाम में जूस पिला कर अनशन समाप्त किया गया. वह क्षण आज भी याद है. इसके बाद 14 जनवरी के दिन जेपी की सभा कारगली मैदान, बेरमो में थी. हमलोग बडी संख्या में दामोदर नदी पार कर पैदल ही करगली मैदान पहुंचे और जेपी की सभा सुनी. जब इमरजेंसी लगी, जैसे लगा मानो सब कुछ खामोश हो गया.
इमरजेंसी के दौरान तेनुघाट में कई नेता पकड़े गये और जेलों में भेज दिये गये.

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