जमशेदपुर-गोपाल मैदान में भव्य टुसू मेला, हजारो लोग उमडे़

 

भाषा-संस्कृति बांटती नहीं, जोडती है: विघुत वरण महतो

 

संवाददाता.जमशेदपुर.21 जनवरी

सांसद विघुत वरण महतो ने कहा कि भाषा, संस्कृति व परंपरा झारखंडियों की पहचान है। वैसे भी भाषा व संस्कृति हमेशा एकता का ही संदेश देती है। यह हमें बांटने का नहीं, वरन आपस में जोडने का कार्य करती है। इसलिय यहां के लोगों को अपनी परंपरा व संस्कृति को बचाकर रखना चाहिये। वे आज बिष्टुपुर गोपाल (रीगल) मैदान में झारखंडवासी एकता मंच द्धारा आयोजित टुसू मेला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इसके पूर्व उन्होंने मंच पर रखे गयी भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, स्व. निर्मल महतो, पूर्व सांसद सुनील महतो तथा राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुधीर महतो की तस्वीर के समक्ष दीप जलाकर समारोह का उद्घाटन किया। सांसद श्री महतो ने आगे कहा कि पूरे देश में झारखंडियों की जीवन शैली के कारण उनकी एक अलग ही पहचान है। साथ ही इस तरह के पर्व-त्यौहार हमें सहारा देती है। सांसद ने कहा कि यहां के सांस्कृतिक कर्याक्रम आदिवासी व मूलवासियों के आत्मा में बसता है. पुरखों की इस मजबूत परंपरा हमारा जीवन से जुडा हुआ है, इसलिये आनेवाली पीढी की यह जिम्मेवारी बनती है कि वे किस तरह इसे कायम रखें, ताकि हमारा समाज व संस्कृति मजबूत बन सके. हमें अपना विकास के साथ-साथ समाज के विकास के संबंध में भी सोचना चाहिये।

तीन दिन की हो सरकारी छुटटी- साधुचरण महतो

भाजपा विधायक साधुचरण महतो ने कहा कि टुसू मेला हमें विरासत में मिली है, इस लिहाज से यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर है. वैसे भी झारखंड की परंपरा विभिन्नता में एकता है, इसलिए इसे कायम रखना हमारा दायित्व है। अपनी संस्कृति को बचाकर रखने के उद्देश्य से वर्ष 2006 में तत्कालीन सांसद स्व. सुनील महतो के प्रयास से शहर के बीचों-बीच इसे आरंभ किया गया था, जो आज भी जारी है और आगे भी जारी रहेगा। भाजपा विधायक ने युवाओं से शिक्षा पर विशेष जोर देने का आहवान करते हुए आगे कहा कि टुसू और मकर पर्व पर 3 दिन की सरकारी छुटटी के लिए विधानसभा में आवाज उठायेंगें।

टुसू पर्व खुशी बांटने का एक मौका- मेनका सरदार

भाजपा विधायक मेनका सरदार ने कहा कि पर्व-त्योहार हमें जीने की प्रेरणा तथा ऊर्जा प्रदान करती है. यह नहीं, हमें आपस में खुशी बांटने का एक मौका भी देती है. चूंकि पर्व-त्यौहार हमें विरासत में मिली है, इसलिय इसे हमे संभालकर रखने की जरुरत है. यही संस्कृति व परंपरा हमारी ताकत है, जिसे हमें बनाकर रखना है। त्यौहारों के माध्यम से हमें इसकी झलक भी मिलती है। टुसू पर्व लोगों के अंर्तआत्मा के साथ जुडा हुआ है. झारखंड का गठन यहां की भाषा व संस्कृति के विकास के लिये किया गया है. इसलिय सरकारी स्तर पर यहां साहित्य व सांस्कृतिक एकेडमी के गठन होने के साथ-साथ हमारी भाषा पर रिसर्च भी होनी चाहीये।

काले ने लगाया शहीदों के नाम जयघोष

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले ने कहा कि टुसू पर्व झारखंड की मिठास को दर्शाता है। नये वर्ष पर मनाये जानेवाले इस पर्व में न सिर्फ अमीर, बल्कि गरीब भी अपने स्तर से खुशियों का इजहार करते हैं। काले ने झारखंड के शहीदों के नाम जोरदार जयघोष लगाकर लोगों के मन में एक नई ऊर्जा पैदा कर दी।

सभी को एक मंच पर लाने में कामयाब रहे बाबू

कार्यक्रम के कर्ता-धर्ता सह मंच के मुख्य संयोजक आस्तिक महतो (बाबू) के प्रयास से अलग-अलग राजनीतिक दल तथा समाज के इधर-उधर बिखरे हुए लोगों को एक मंच पर लाया गया। श्री महतो के प्रयास का ही नतीजा था कि मंच में लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने शिरकत की। उन्हीं के प्रयास से इस बार के कार्यक्रम में उम्मीद से अधिक लोग जुटे। श्री महतो उक्त कार्यक्रम की सफलता के लिये महीने भर से भी अधिक समय से अपने साथियों के साथ जुटे हुए थे। इसके लिये जगह-जगह बैनर, पोस्टर, बैनर आदि लगाने का कायरा चल रहा था। मंगलवार को भी देर रात्रि  तक वे स्वयं गोपाल मैदान में डटकर तैयारियों का जायाजा लेते रहे।

सभी को आई सुनील व सुधीर दा की याद

समारोह में मौजूद सभी वक्ताओं को पूर्व सांसद स्व. सुनील महतो और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. सुधीर महतो की याद आई और मुख्य अतिथि से लेकर लगभग सभी वक्ताओं ने उन्हें याद करते हुए नमन किया। ज्ञात हो कि उक्त मेला को वर्ष 2006 में गोपाल मैदान में आयोजित करवाने में पूर्व सांसद सुनील महतो ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्हीं के प्रयास से मेला का आयोजन वहां आरंभ हो पाया था।

कौन कौन थे शामील

इस मौके पर अन्य अतिथियों में मंच के मुख्य्  संयोजक आस्तिक महतो, भाजपा विधायक मेनका सरदार व साधुचरण महतो, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले सुनील महतो मीता, फणिभूषण महतो, सचिन महतो आदि मौजूद थे। अतिथियों का स्वागत आस्तिक महतो (बाबू दा) ने किया। समारोह को सफल बनाने में बबलू महतो, लक्की सरदार, विजया महतो, रोडेया सोरेन, सत्यनारायण महतो, निर्मल भट्टाचार्य, पवन झा, अशोक महतो, अजय रजक, सचिन महतो, महेश्वर महतो, काबलू महतो, सीनू राव, जगदीश राव सहित कई लोग शामिल थे.

 

 

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