BIG BRAKING CHAIBASA चक्रधरपुर के सूर्या नरसिंह होम में इलाज में लापरवाही बरते जाने नवजात की मौत के बाद परिजनों ने काटा बबाल, चक्रधरपुर सूर्य नरसिंह होम पर लगा गंभीर आरोप, थाने में की शिकायत

आयुषमान से ईलाज कराने के बाबजूद दस हजार लगा फिस नहीं देने पर बंधक बना रखा था प्रसुता को अस्पताल में

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संतोष वर्मा

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल मुख्यालय क्षेत्र में मंगलवार को चक्रधरपुर के सूर्या नर्सिंग होम पर गोपीनाथपुर के ग्रामीणों ने ईलाज में लापरवाही और आयुष्मान से ईलाज में कोताही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है. इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब एक नवजात की ईलाज के क्रम में जमशेदपुर के ब्रह्मानंद अस्पताल में मौत हो गयी. पीड़ित परिवार का कहना है की सूर्या नर्सिंग होम के लापरवाही से नवजात की जान गयी. दरअसल बीते शुक्रवार को कल्पना महतो प्रसव पीड़ा के बाद ईलाज के लिए सूर्या नर्सिंग होम पहुंची थी. उनका शनिवार को सफल प्रसव भी हुआ. लेकिन बच्चे का वजन कम होने व बच्चे द्वारा पेट में ही मल त्याग देने से उसकी हालत गंभीर हो गई थी. बच्चे को बेहतर ईलाज के लिए क्रिटिकल केयर यूनिट में रखा गया. फिर मामला बिगड़ता देख उसे जमशेदपुर ब्रह्मानंद अस्पताल रेफर कर दिया गया था। बच्चे की ब्रह्मानंद में ईलाज के दौरान मौत हो गयी.
इस पुरे मामले में कल्पना महतो के भाई बासुदेव महतो और देवर लव किशोर महतो ने आरोप लगाया है की बच्चे के जन्म के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को ना तो उसकी माँ को दिखाया और ना ही उसके पिता को बच्चे को दिखाया गया. बच्चे की हालत बिगड़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को उसके पिता को दिखाया. यही नहीं आयुष्मान से ईलाज के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने दस हजार भी वसूल लिए. दस हजार नहीं देने पर प्रसूता कल्पना महतो को बंधक बना लिया. अस्पताल की लापरवाही से उसके बच्चे की जान चली गयी.
इधर अस्पताल के निदेशक डॉ गौरी शंकर महतो ने बताया की मानवता के नाते गरीब परिवार का आयुष्मान के तहत ईलाज किया गया. सफलतापूर्वक प्रसव भी हुआ. लेकिन बच्चे का वजन कम था और मल खा चूका था बच्चा जिसके कारण बच्चे की हालत बिगड़ गयी. डॉ गौरी शंकर महतो ने कहा की बच्चे के पैदा होते ही उसे उसके माता पिता को दिखाया गया था. और यह आरोप निराधार है की बच्चे को दिखाया नहीं गया. आयुष्मान योजना में कुछ खर्च पर छुट नहीं है, उन्हीं खर्च की वसूली पीड़ित परिवार से की गयी. प्रसव के बाद महिला कमजोर थी इसलिए उसे अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया, बंधक बनाने का आरोप भी निराधार है

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